Rudraksh | जनिए रुद्राक्ष के प्रकार और उसकी महिमा

Share Now...

रुद्राक्ष शिव को प्रिय और पृथ्वी पर समस्त पापो का नाश करने वाला है।

रुद्राक्ष की उत्पत्ति को लेकर एक कथा है- एक बार शिव अनेक वर्षों तक घोर तपस्या में लीन थे।

उनके मन मे विचार आया कि मै ही इस संसार का कल्याण करने वाला हूँ किस उपाय से सबका कल्याण होगा।

ये विचार करते हुए शिव ने अपने नेत्र खोले, उनके नेत्र खोलते ही आँखों से आँसू बहने लगे जिससे रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति हुई।

रुद्राक्ष अर्थात रुद्र (भगवान शिव) के आँसू।

उभरे हुए छोटे छोटे दानो वाला, मजबूत, समान आकर का रुद्राक्ष उत्तम फल देता है।

चूंकि रुद्राक्ष एक फल का बीज है अतः जानवरो के द्वारा खाया हुआ, टूटा हुआ,

जिस पर उभरे हुए दाने ना हो ऐसा रुद्राक्ष धारण नही करना चाहिए।

रूद्राक्ष के प्रकार और उसके महत्व

रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक प्राप्त होता है।

सभी के अलग अलग महत्व और धारण करने के मंत्र भी अलग अलग होते है।

एक मुखी रुद्राक्ष

एक मुखी रुद्राक्ष को स्वयं शिव का रूप माना जाता है,

इसे धारण करने वाला व्यक्ति भोग और मोक्ष दोनों को प्राप्त करता है।

उसको लक्ष्मी की कमी नही होती है।

इसके ग्रह सूर्यदेव है इसको धारण करने से सूर्यदेव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

ये रुद्राक्ष सम्पूर्ण कामनाओ को पूर्ण करता है।
मंत्र:- ॐ ह्रीं नमः

हनुमान चालीसा है-आध्यात्मिकता का मार्ग

दो मुखी रुद्राक्ष

यह सभी पापो का नाश करता है।

इसके स्वामी ग्रह चंद्रमा है।

इसको धारण करने से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

किसी कार्य को करने में मन लगा रहता है।
मंत्र:- ॐ नमः

तीन मुखी रुद्राक्ष

ये सभी साधन का फल देने वाला है।

इसके स्वामी ग्रह मंगल है,

इसको धारण करने से व्यक्ति निर्भीक और साहसी होता है।
मंत्र:- ॐ क्लीं नमः

चार मुखी रुद्राक्ष

यह रुद्राक्ष ब्रह्मा का स्वरूप माना जाता है।

इसके स्वामी ग्रह बुध है।

इसको धारण करने वाले व्यक्ति के विवेक में वृद्धि होती वे किसी व्यक्ति को अपनी वाणी और विचारों से आकर्षित कर लेते है।
मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः

पंच मुखी रुद्राक्ष

मनोवांछित फल प्रदान कर समस्त पापो का नाश करने वाले इस रुद्राक्ष के देवता रुद्र है ।

इसके स्वामी ग्रह बृहस्पति है।

इसको धारण करने से यश, कीर्ति, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः

छः मुखी रुद्राक्ष

इस रुद्राक्ष के स्वामी कार्तिकेय है।

इसके स्वामी ग्रह देवता शुक्र है।

इसको दाहिने हाथ पर धारण करने से भगवान की विशेष कृपा होती है।

शरीर मे चमड़ी से संबंधित रोगों के सुधार में फायदा होता है।
मंत्र:- ॐ ह्रीं हूं नमः

सप्त मुखी रुद्राक्ष

इस रुद्राक्ष में अनंग स्वरूप विराजमान होते है।

इसके स्वामी ग्रह शनि देव है।

इसको धारण करने से दरिद्रता दूर होकर ऐश्वर्य की प्राप्ति निश्चित ही होती है।
मंत्र :- ॐ हूं नमः

अष्ट मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष अष्टमूर्ति भैरव के स्वरूप में है।

इसके स्वामी ग्रह राहु है।

इसको धारण करने से पूरी उम्र प्राप्त होती है धारक दिर्घायु होता है।
मंत्र :- ॐ हूं नमः

नो मुखी रुद्राक्ष

इस रुद्राक्ष के देवता भैरव और कपिलमुनि को माना जाता है,

स्वयं दुर्गा इसकी देवी है।

इसके स्वामी ग्रह केतु है।

इसको बाए हाथ मे धारण करने से व्यक्ति मान प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
मंत्र:- ॐ ह्रीं हूं नमः

दस मुखी रुद्राक्ष

सभी ग्रह इसके है।

यह साक्षात भगवान विष्णु का रूप है दस महाविद्याए इसके देवता है।

इसको धारण करने वाला मनुष्य नवग्रह के अशुभ प्रभाव से दूर रहता है।

सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष

सभी ग्रह और 11 रुद्र इसके देवता है।

इसको धारण करने वाला मनुष्य सभी क्षेत्र में सफलता को प्राप्त करता है।
मंत्र :- ॐ ह्रीं हूं नमः

बारह मुखी रुद्राक्ष

इसके देवता एवं ग्रह सूर्य है।

इसको धारण करने से तेज, ऐश्वर्य, नोकरी आदि प्राप्त होता है।
मंत्र :- ॐ क्रों क्षों रौं नमः

तेरह मुखी रुद्राक्ष

इसके देवता कामदेव है।

इसको धारण करने से तेज़ में वृद्धि होती है।

व्यक्ति में आकर्षण होता और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः

चौदह मुखी रुद्राक्ष

इसके देवता भगवान शिव और हनुमानजी है।

इसके स्वामी ग्रह शनिदेव है।

इसका प्रयोग इन्द्रियों को वश में करने के लिए किया जाता है।
मंत्र :- ॐ नमः

रुद्राक्ष को धारण करने के पहले पूजा कर के कम से कम ग्यारह माला संबंधित रुद्राक्ष के मंत्र की जाप करना चाहिए।

दोस्तो रुद्राक्ष के बारे में बताए गए जानकारी  के बारे आपकी क्या राय है,

कृपया Comment में जरूर बताएं,

महादेव के प्रिय रुद्राक्ष ये जानकारी अगर आपको अच्छी लगी हो तो…

कृपया इस ज्ञान को और लोगो तक जरूर पहुँचाये ( Share ) करे ।


Share Now...

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*