जानिए सूर्य ग्रहण के बारे मे और करे ये  महाउपाय …

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सूर्यग्रहण कब होता है?

सूर्यग्रहण की पौराणिक कथा

कब होगा सूर्यग्रहण ?

सूतक काल कब से कब तक रहेगा ?

ग्रहणकाल में क्या करे और क्या ना करे ?

ग्रहण काल मे करे ये  महाउपाय …

 सूर्य को मजबूत करने के उपाय

 

सूर्य ग्रहण कब होता है ?

ग्रहण को लेकर न जाने कितने ही तथ्य और कितने ही मत है। यहाँ तक कि ग्रहण को लेकर मान्यताएं भी अत्यंत अद्भुत है

ओर सभी तथ्यों पर प्रकाश डालने से पहले यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि ग्रहण होता कैसे है!

भारत मे सूर्यग्रहण का आध्यात्मिक महत्व भी होता है।

जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है जिससे सूर्य की कुछ या सारी किरणे पृथ्वी पर नही आ पाती है

और पृथ्वी पर जब चन्द्रमा की छाया पड़ती है तब सूर्यग्रहण होता है।

यह केवल अमावस्या को ही होता है यह हर अमावस्या को नही होता क्योंकि चंद्रमा और पृथ्वी का भ्रमनपथ अलग अलग होता है।

ज्योतिष विज्ञान का सूर्यग्रहण को लेकर मत है कि यह प्रकति का एक अद्भुत चमत्कार है

जो कि एक अद्भुत विचित्र ज्ञान ग्रह और उपग्रहों की गतिविधियां एवं उनके स्वरूप को स्पष्ट करता है

जहाँ ज्योतिष ज्ञान सूर्यग्रहण को प्रकति का एक अद्भुत ओर अनूठा चमत्कार बताता है

वही आम लोगो की तरफ अपने ध्यान को केंद्रित किया जाए तो हिन्दू धर्म के अनुसार ग्रहण होना अशुभ माना जाता है।

सूर्यग्रहण की एक पौराणिक कथा:-

यह कथा उस समय की है जब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप लेकर देवताओ को अमृत पान करवाया था कहा जाता है

कि जब मोहिनी देवताओं को अमृत पान करवा रही थी

तब दैत्य राहु देवताओ की पंक्ति में जा बैठा और अमृत पान कर लिया दैत्य राहु सूर्य और चंद्रमा के बीच बैठा था

इसलिए जैसे ही उसने अमृत पान किया तो सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान कर भगवान विष्णु को तत्काल बता दिया

जिससे भगवान विष्णु क्रोध में आ गए ओर राहु को यमलोक पहुँचा दिया।

लेकिन राहु ने एक बूंद अमृत पी लिया था इसलिए वो मरता नही है और उसका सिर उसके साथ ही घूमता रहता है।

इसी कथा अनुसार यह माना जाता है कि जब भी सूर्य और चंद्र निकट आते है उन्हें ग्रहण लग जाता है।

कब होगा सूर्यग्रहण?

भारत मे 21 जून साल का सबसे बड़ा दिन होता है।

शास्त्रों में रविवार को सूर्य का दिन बताया जाता है। भारत सहित अनेक देशों में यह ग्रहण देखने को मिलेगा।

यह वलयाकार सूर्यग्रहण होगा। लगभग 3:34 घंटे के ग्रहण की अवधि में स्पर्श सुबह 10:30 बजे मध्य 12:27 बजे और मोक्ष दोपहर 02;04 बजे होगा।

भारत मे भी अलग अलग स्थानों पर इसका समय अलग अलग होगा।

सूतक काल कब से कब तक रहेगा?

सूर्यग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले से शुरू हो जाता है

चूँकि भारत मे यह ग्रहण दिखाई देगा इसलिए यहाँ पर इसका धार्मिक महत्व भी रहेगा।

सूतक काल 20 जून की रात 9:21 बजे से शुरू होकर के ग्रहण खत्म होने तक रहेगा।

ग्रहण काल मे क्या करे औऱ क्या ना करे ।

ग्रहण काल मे क्या करे:-

सूर्य ग्रहण के समय मंत्र जाप , ईष्ट देव का ध्यान करने से कई गुना फल मिलता है ।

सूर्य ग्रहण के समय गाय को चारा या रोटी , पक्षियों को दाना , कुत्तो को कुछ ना कुछ खाने को और जरूरत मंद को जरूरत की वस्तु दान में देना चाहिए ।

ग्रहण काल के समय शाबर मंत्र जाप करना चाहिए जिससे ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचा जा सके ।

सूर्य ग्रहण के समय खाने-पीने की वस्तु में पवित्र तुलसी के पत्ते डाल देना चाहिए

जिससे ग्रहण के समय होने वाले बुरे प्रभाव से खाने पीने की वस्तु को पवित्र रखा जा सके ।

ग्रहण काल समाप्त होने के बाद पूरे घर को पवित्र गंगा जल से धोना चाहिए एवं जरूरत मंद को दान देना चाहिए।

क्या ना करे ग्रहण काल मे:-

ग्रहण काल के समय अन्न नही खाना चाहिए ।

सूर्य ग्रहण के समय मंदिर जाना , पूजा- पाठ करना या मूर्ति को स्पर्श करना नही चाहिए ।

सूर्य ग्रहण के समय घर में रहना चाहिए और जब तक जरूरी ना हो घर से बाहर नही जाना चाहिए ।

सूर्य ग्रहण ख़त्म होने के पश्चात स्पर्श किए हुए कपड़े आदि को धोना चाहिए एवं जल में पवित्र गंगा जल डाल कर स्नान करना चाहिए ।

सूर्य ग्रहण के समय फूल-पत्ती नही तोडना चाहिए , ग्रहण काल के समय सोना नही चाहिए एवं खुली आँखों से सूर्य को नही देखना चाहिए ऐसा करने से सूर्य से आने वाली विकिरणों से आँखे ख़राब होने का डर रहता है ।

सूर्य ग्रहण के समय कोई भी नया कार्य एवं यात्रा करने से बचना चाहिए ।

गर्भवती स्त्री को घर से बाहर जाने से बचना चाहिए। इससे बच्चे पर शारीरिक, मानसिक रूप से असर पड़ता है।

ग्रहण काल मे करे ये  महाउपाय

ग्रहण काल मे किये गए कुछ विशेष उपाय से जीवन मे आ रही परेशानी को समाप्त किया जाता है,

ग्रहण काल मे मंदिर एवं मूर्ति पूजा वर्जित है

परंतु कुछ विशेष उपाय से जीवन मे आ रही परेशानी को ख़त्म किया जा सकता है।

ग्रहण काल के कुछ महा उपाय:-

यश, नोकरी, व्यापार में लाभ वृद्धि, विद्या, माँ लक्ष्मी की कृपा, धन धान्य आदि देने वाला बिसा मंत्र बनाना और सिद्ध करना।

11000 नर्वाण मंत्र के द्वारा सिद्ध करने वाला यह मंत्र अत्यंत ही लाभदायक है।

सामग्री :-   भोजपत्र, केसर या चंदन, चांदी या सोने का ताबीज या लाल कपड़ा, चमेली की लकड़ी या सोने का तार।

स्नान आदि से निवृत होकर के यंत्र बनाना है इसको बनाकर केवल मंत्र जप करना लेकिन इस मंत्र की पूजा नही करना है।

यंत्र :-

यंत्र बनाने का तरीका:-

यह यंत्र वंतोगति (बाएं से) बनता है भोजपत्र पर पहली लाइन में पहले 10, 9, 1 दूसरी लाइन में 6, 14 तीसरी लाइन में 4, 11, 5 बनाना है

और बीच वाले हिस्से में पहले 2, 7 फिर 8,3 लिखना है फिर  ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं   लिखकर यंत्र को पूरा बना लेना है।

इसके बाद हाथ मे जल पूर्ण अक्षत लेकर संकल्प लेकर जप करे।

जप पूरा होने के बाद हाथ मे जल लेकर बोले कि मैने जो भी मंत्र जप किया है उसका पूर्ण फल मुझे प्राप्त हो

और इस मंत्र से जो शक्ति उत्पन्न हुई है में इसे यंत्रराज को अर्पित करता हूं या करती हुँ ऐसा कहकर जल जमीन पर छोड़ दे।

यंत्र को अगले दिन सुबह पूजा कर के 108 बार नर्वाण मंत्र का जाप कर के ताबीज या लाल कपड़े में बांध कर धारण करे।

  नर्वाण मंत्र :-  ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

ग्रहण काल मे मंत्र जाप की महत्ता बताई  गयी है इस समय मंत्र जाप का दुगना फल मिलता है

सूर्य ग्रहण मे मंत्र जाप करके हम अपने दुखो का अंत कर सकते है , ग्रहण करीब तीन घंटे का होगा

एस बीच हम मंत्र जाप करके दुगना फल प्राप्त कर सकते है ,

ग्रहण काल साधको के अथ्यधिक महत्वपूर्ण होता है एसलिए इस अद्भुद्त समय का सही उपयोग करके हम इस समय का लाभ उठा सकते है  |

इन तीनों मंत्र को जाप करके या तीनों मे से एक मंत्र का जाप करके जीवन के दुखो का अंत किया जा सकता है |

किसी भी मंत्र जाप कम से कम 7 या  11 माला  जरूर  करे |

ग्रहण काल करे ये मंत्र जाप :-   

धन प्राप्ति हेतु शाबर मंत्र :-

ॐ श्री शुक्ले महाशुक्ले, महाशुक्ले कमलदल निवासे श्री महालक्ष्मी नमो नमः। 

 लक्ष्मी माई सबकी सवाई, आओ चेतो करो भलाई, ना करो तो सात समुद्रों की दुहाई,               

  ऋद्धि नाथ देवों नौ नाथ चैरासी सिद्धों की दुहाई  |

 

स्वयं की रक्षा हेतु :-   

  ॐ नमः वज्र का कोठा

जिसमें पिण्ड हमारा पैठा

ईश्वर की कुंजी , ब्रह्मा का ताला

मेरे आठोंयाम का यती हनुमन्त रखवाला |

 

सूर्य देव का महा मंत्र  :-   ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।

 

नर्वाण मंत्र :-    ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे |

 

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