ज्योतिष विज्ञान क्या है ? भाग 2

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1.     भारतीय ज्योतिष की अवधारणा मूल रूप से नौ ग्रहों पर टिकी हुई है। इसमें सात ग्रह मुख्य माने जाते हैं और दो को छाया ग्रह कहते हैं। सूर्य राजा है, चंद्रमा मंत्री, बुध मुंशी, बृहस्पति गुरु, शुक्र पुरोहित, शनि राजपुत्र और छाया ग्रह राहु, चांडाल केतु अछूत है | 

2.     जीवन का मुख्य आधार प्रकाश जिस दिन इस धरती पर नहीं होगा, शायद जीवन भी संभव नहीं होगा, इसलिए ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहों का राजा कहलाता है और उसको आधार मानकर समय की गणना की जाती है।


‘एते ग्रहा बलिष्ठाः प्रसूति काले नृणां स्वमूर्तिसमम्‌। कुर्युनेंह नियतं वहवश्च  समागता मिश्रम्‌॥’

ऊपर दिए गए श्लोक से जाहिर है| कि सभी ग्रहों का प्रकाश और नक्षत्रों का प्रभाव धरती पर रहने वाले सभी जीव-जन्तुओं और चीजों पर पड़ता है। अलग-अलग जगहों पर ग्रहों की रोशनी का कोण अलग-अलग होने की वजह से प्रकाश की तीव्रता में फर्क आ जाता है। समय के साथ इसका असर भी बदलता जाता है। जिस माहौल में जीव रहता है,  उसी के अनुरूप उसमें संबंधित तत्व भारी या हल्के होते जाते हैं। हरेक की अपनी विशेषता होती है। जैसे,  किसी स्थान विशेष में पैदा होने वाला मनुष्य उस स्थान पर पड़ने वाली ग्रह रश्मियों की विशेषताओं के कारण अन्य स्थान पर उसी समय जन्मे व्यक्ति की अपेक्षा अलग स्वभाव और आकार-प्रकार का होता है।


इस तरह ज्योतिष कोई जादू-टोना या चमत्कार नहीं, बल्कि विज्ञान की ही एक शाखा जैसा है। मोटे तौर पर विज्ञान के अध्ययन को दो भागों में बाँटा जाता है :-


1. भौतिक विज्ञान
2. व्यावहारिक विज्ञान

 


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