सेनापति मंगल ग्रह के कमजोर होने के कारण एवं उपाय:- Mangal Grah Ke Kamjor Hone Ke karan

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मंगल ग्रह को ज्योतिष में

भाई ,भूमि , ऊर्जा , साहस ,

पराक्रम , निडरता , तकनीकी क्षेत्र का कारक माना जाता है।

कुंडली मे अगर “मंगल ग्रह ज्योतिष” बलवान अवस्था मे है तो इन सभी कारकत्व में वृद्धि एवं कमजोर होने पर कमी देखी जाती है ।

“मंगल ग्रह ज्योतिष” मेष औऱ वृश्चिक राशि के स्वामी है।

मंगल ग्रह मकर राशि में उच्च के होकर बलवान अवस्था मे होते है , वही मंगल ग्रह का कर्क राशि मे नीच का स्वभाव होता है ।

मंगल ग्रह  नक्षत्र  में मृगशिरा , चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी होते है।

 

चलिए जानते है ग्रहों के सेनापति मंगल ग्रह का मानव जीवन पर ज्योतिषी दृष्टि से क्या असर होता है ?

कुंडली मे मंगल स्वयं की राशि मे , उच्च राशि में , मित्र राशि में हो और अशुभ ग्रहों से दृष्टि या युति में ना हो कर ,

शुभ ग्रहों से दृष्टि और युति में होते है तो व्यक्ति निडर , साहसी और हर कार्य को हिम्मत से करने वाला होगा ।

कुंडली मे अगर मंगल बलवान अवस्था मे हो कर लग्न या जातक के स्वभाव से संबंध बना ले तो जातक का स्वभाव ज़िद्दी ,

किसी कार्य को प्रारंभ करने के बाद उसको पूर्ण रूप से ख़त्म करने वाला , निडर एवं हटी स्वभाव का होगा ।

मंगल ग्रह का संबंध कुंडली के लग्न या जातक के स्वभाव से हो कर मंगल ग्रह बलवान अवस्था मे होने से जातक की उम्र वास्तविक उम्र से कम लगती है।

जातक के मुख पर तेज़ और पराक्रम देखने को मिलता है , वह किसी के दबाव में कार्य नही करता है।

उसके स्वभाव में क्रोध और ज़िद्दीपन होता है एवं ऐसे जातक अधिकतर पुलिस ,सेना , कंप्यूटर , इंजीनियरिंग, भूमि के क्षेत्र में कार्यरत होते है ।

कुंडली मे मंगल की स्थिति बलवान अवस्था मे होने पर भाइयो का सहयोग मिलता है या भाई के कारण भाग्य उदय होता है ।

मंगल ग्रह अगर कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव  में हो तो,

जातक या जातिका की कुंडली मे मांगलिक दोष का निर्माण होता है यह दोष सप्तम , अष्टम औऱ द्वादश भाव मे अधिक प्रभावशाली हो जाता है ।

मांगलिक दोष होने के कारण जातक या जातिका के विवाह में विलंब और वैवाहिक जीवन मे उतार चढ़ाव की स्थिति बनी रहती है ।

मांगलिक दोष के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए जातक को मांगलिक दोष के उपाय करने चाहिए ।

मंगल ग्रह के बलवान होने पर जमीन जायदाद के कार्यो में सफलता मिलती है ।

मंगल ग्रह कुंडली मे अगर कर्क राशि मे विराजमान है तो मंगल ग्रह नीच के होते है और कमजोर अवस्था में रहते है ।

कुंडली मे मंगल ग्रह अगर राहु-केतु या शनि के साथ विराजमान है तो अंगारक दोष का निर्माण करते है ।

मंगल ग्रह के दोषों को दूर करने के महाउपाय :-

 

कुंडली मे अगर मंगल ग्रह कमजोर अवस्था मे है तो हनुमान जी की सेवा और आराधना करनी चाहिए ।

मंगल ग्रह के शांति के लिए  तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए |

मंगल संबंधित दोष के लिए मंगलवार को मसूर की दाल , गुड़ का दान करना या गाय माता को खिलाना चाहिए ।

कुंडली मे अगर मांगलिक दोष है तो विवाह मांगलिक वर या वधु से ही करना चाहिए एवं विवाह के पूर्व मांगलिक दोष की पूजा करवानी चाहिए ।

मांगलिक दोष की पूजा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित मंगलनाथ मंदिर में जाकर विधि-विधान से पूजा करें। (उज्जैन मंगल की जन्मभूमि है।)

“मंगल ग्रह ज्योतिष” के प्रभाव से बचने के लिए प्रति मंगलवार को हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण का पाठ से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है ।

बजरंग बली के पैर का सिंदूर का तिलक प्रतिदिन मस्तक पर लगाए ।

मंगल दोष से पीड़ित व्यक्ति को संभव हो तो प्रतिदिन या हर मंगलवार को बंदरो को गुड़ और चने खिलना चाहिए।

संध्या के समय अपने लंबाई के बराबर मोली की बत्ती बना कर चमेली के तेल का दीपक लगा कर सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए , जब तक पाठ हो तब तक दीपक जलता रहे । ( यह उपाय कम से कम 7 या 11 मंगलवार संकल्प ले कर करना चाहिए )

मंगला गौरी माता की साधना और पूजन करने से भी इस दोष से मुक्ति मिलती है ।

हर तीन महीने में हनुमानजी के मंदिर पर ध्वजा चढ़ाने से मंगल दोष से मुक्ति मिलती है ।

“मंगल ग्रह ज्योतिष”  कमजोर होने पर अनामिका उंगली में मूंगा रत्न धारण करना चाहिए । ( रत्न कुंडली विश्लेषण के बाद ही धारण करे )

सम्पूर्ण सुंदरकाण्ड

मंगल ग्रह के मंत्र ||  Mangal Grah ke Mantra

 मंगल का वैदिक मंत्र –
 ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्।
अपां रेतां सि जिन्वति।।

मंगल का तांत्रिक मंत्र –
ॐ अं अंङ्गारकाय नम:

मंगल का बीज मंत्र –
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

 

• संकल्प की विधि:-

• किसी भी उपाय को शुक्ल पक्ष में शुरू करे उस दिवस प्रातःकाल सूर्योदय के 1 घंटे के भीतर दाहिने हाथ मे जल और पूर्ण अक्षत ले।

   अपना नाम, गोत्र, वार, तिथि,दिशा, स्थान के देवता का नाम, ईष्ट देवता का नाम लेकर ,

   बोले मै इस उपाय को (अपना उपाय बोले) इस कार्य हेतु (अपना कार्य बोले) कर रहा हूँ।

    जिसका पूर्ण फल आप स्वयं को प्राप्त हो ऐसा बोलकर अहम करिष्यामि बोलते हुए जल जमीन पर छोड़ दे।

 

 

मंगल ग्रह के बताए गए उपाय में से कुछ उपाय करके
भी कुंडली में मंगल ग्रह को मजबूत कर सकते है एवं जीवन में आ रही परेशानियों को दूर कर सकते है ।
उपाय कम से कम 90 दिनों तक लगातार करे और उचित फल की कामना करे।

 

हम आशा करते है मंगल ग्रह के बारे मे जानकारी से आप संतुस्ट होगे ,
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6 Comments on “surya ko majboot karne ke upay :- सूर्य को मजबूत करने के उपाय”

  1. सूर्य ग्रह कमजोर होने के उपाय आपने बहुत सटीक जानकारी दी है जातकों को इससे लाभ होगा

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