Mansik Asanti Hone Ke Karan Aur Unke Upay:-मानसिक अशांति होने के कारण और उनके उपाय

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ज्योतिष में चंद्रमा को मन और माँ का कारक माना जाता है ।

मानव जीवन मे चंद्रमा का अहम भूमिका होती है क्योंकि चंद्रमा मन है और जब तक मन शांत नहीं या मानसिक शांति नही तब जीवन में सुखी होना असंभव है।

चंद्रमा हमारा मन है , हम जो भी सोचते है जो भी चाहते है वो सभी चंद्रमा के अच्छे और बुरे अवस्था होने पर निर्भर करता है,
क्योंकि “मन के हारे हार है और मन के जीते जीत”

माँ के कारक चंद्रमा होने के कारण इन्हें चंदा मामा भी कहा जाता है।

कुंडली मे कमजोर चंद्रमा  होने पर माँ से संबंध और माँ का स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव बना रहता है।

वही चंद्रमा मन के कारक होने के कारण कुंडली मे अगर कमजोर चंद्रमा है तो मानसिक अशांति , अनावश्यक चिंता ,मन मे घबराहट ,माता के स्वास्थ्य में कमी , माता या माता समान स्त्री से संबंध में ख़राबी होना संभव है ।

सूर्य को मजबूत करने के उपाय

चंद्रमा ग्रह  कमजोर होने के प्रमुख ज्योतिषी लक्षण :-

1.  कुंडली मे अगर चंद्रमा पाप ग्रह से युति में हो या पाप ग्रह से दृष्टि संबंध हो या पाप ग्रह के नक्षत्र में हो तब चंद्रमा पीड़ित होता है ।

 पाप ग्रह :- शनि ,राहु , मंगल आदि ।
शनि से दृष्टि होने पर विष दोष नामक दुर्योग का निर्माण होता है इस योग में जन्मा जातक का दिमाग हमेशा चलता रहता है।

हमेशा कुछ ना कुछ सोचते रहते है मन और दिमाग में शांति नही होती है।

2. कुंडली मे चंद्रमा लग्न से छठे भाव मे आठवे भाव मे या बारहवे भाव मे हो तब चंद्रमा कमजोर अवस्था मे होता है
इन भावों को कुंडली का अशुभ भाव माना जाता है ।

3. कुंडली के किसी भी भाव मे चंद्रमा अकेले विराजमान हो चंद्रमा एक घर आगे और एक घर पीछे कोई और ग्रह ना हो तब केमद्रुम दोष का निर्माण होता है।

इस योग में जन्मे जातक को हमेशा मानसिक अशांति , मन मे अनावश्यक भय , सब कुछ होने के बाद भी मानसिक अशांति ,ऐसे जातक को मानसिक संतुष्टि नही मिलती है।इस योग को दरिद्र योग के नाम से भी जाना जाता है ।

4. चंद्रमा और सूर्य की युति होने पर अमावस दोष का निर्माण होता है ।

5. कुंडली मे चंद्रमा वृश्चिक राशि में होने पर चंद्रमा नीच के हो जाते है जिससे चंद्रमा कमजोर अवस्था मे होते है ।

6. माता के स्वस्थ में बार बार ख़राबी आने पर एवं हमेशा मानसिक अशांति बनी रहने पर कुंडली मे चंद्रमा कमजोर अवस्था मे होता है ।

7. चंद्रमा कमजोर होने पर सास लेने पर परेशानी होती है एवं शीतजन्य रोगों की समस्या होती है ।

8.  चंद्र दोष होने पर नींद ना आने की समस्या होती है एवं अचानक रात में नींद खुल जाती है ।

9.  चंद्र दोष होने पर स्त्री पक्ष से कष्ट एवं हारमोंस की समस्या बनी रहती है ।

10. कुंडली मे अगर चंद्रमा कमजोर हो या कमजोर चंद्रमा के लक्षण होने पर बताए गए उपाय से चंद्र दोष एवं मानसिक अशांति को दूर किया जा सकता है ।

चंद्र ग्रह को मजबूत करने के उपाय :-

1.   प्रतिदिन शिवलिंग पर एक ही लोटे से तीन बार जल चढ़ाए एवं चढ़ाए हुए जल को थोड़ा सा पी ले और थोड़ा सा जल पूरे घर में छिड़क दें।

जल चढ़ाते समय इस मंत्र का लगातार जाप करते रहे।. मंत्र :- ॐ रं ॐ नमः शिवाय

2.  शुक्ल पक्ष के सोमवार से शुरु करके 43  या 21 दिन लगातार  चांदी या स्टील के लोटे में दूध, पानी एवं काले तिल मिला कर संध्या के समय चंद्रमा की तरफ मुख करके

मंत्र :- ॐ सोम सोमाय नमः  बोलते हुए चंद्रमा को 3 बार अर्घ्य दे।

3. 43 या 21 दिन पूरे होने के पश्चात घर के पास के शिव मंदिर मे दूध एवं सफेद चीजो का दान करे एवं हर सोमवार और पूर्णिमा को संध्या काल मे ये कार्य आजीवन करे ।

4. मानसिक अशांति होने रोज कम से कम 10 मिनट मेडिटेशन करने से मानसिक अशांति को दूर किया जा सकता है

परंतु मेडिटेशन कुछ समय या कुछ दिन के लिए नही लगातार करना ही फलदायक होता है ।

5. प्रतिदिन माता या माता के समान स्त्री के पैर छू कर अपने मस्तक पर लगाए ।

6. प्रतिदिन संध्या काल में एक माला ॐ सोम सोमाय नमः मंत्र की और सोमवार व पूर्णिमा को तीन माला जाप करे।

7. अपने जन्मदिवस पर और शिवरात्रि पर अपने नाम से विधि विधान से रुद्राभिषेक पाठ करवाए ।

8. प्रति सोमवार को गाय को कुछ ना कुछ खाने को दे एवं सफेद चीजो ( दूध, चावल आदि) का दान मंदिर या जरूरतमंद को करे ।

9. चंद्रमा के दान माता या माता समान स्त्री को या शिव मंदिर में दान करना चाहिए ।

10. चंद्रमा कमजोर होने पर पूर्णिमा का उपवास और शिव जी का ध्यान करना चाहिए ।

11. मोती या मून स्टोन पहनना चाहिए चंद्रमा जनित दोष मुक्ति के लिए ।

  ( कुंडली विश्लेषण कराने के पश्चात ही रत्न धारण करे ) ।

12. कुंडली  मे चंद्रमा कमजोर हो या कमजोर चंद्रमा के लक्षण होने पर चंद्र दोष से मुक्ति  हेतु  विशेष मंत्र जाप करना चाहिए ।

चंद्रमा कमजोर होने पर किसी भी एक मंत्र का शुक्ल पक्ष  के सोमवार  से  प्रारम्भ कर प्रतिदिन  संध्या के समय 1 या 3 माला  जाप करना चाहिए ।

     1. ॐ सोम सोमाय नमः

     2. ॐ रं ॐ नमः शिवाय

  3. ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:

सुंदरकांड कब क्यों और कैसे पढ़े ।

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