कला और भौतिक सुख के कारक शुक्र ग्रह को कैसे करे प्रसन्न

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शुक्र ग्रह वैदिक ज्योतिष में और 9 ग्रहों में सर्वाधिक शुभ ग्रह माना गए है।

ज्योतिष में शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस, काम-वासना और फैशन-डिजाइनिंग आदि का कारक माना गया है ।

  • शुक्र ग्रह का शुभ रंग सफेद है।
  • शुक्र ग्रह मीन राशि में उच्च के एवं कन्या राशि में नीच के होते है ।
  • कुंडली मे शुक्र ग्रह के कमजोर होने पर कारकत्व में कमी और बलवान अवस्था मे होने पर कारकत्व में वृद्धि देखी जाती है ।
  • लग्न में शुक्र होने या मित्र राशि और उच्च की राशि मे बलवान अवस्था मे होने पर जातक का व्यक्तित्व विपरीत लिंग के व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है।
  • शुक्र के शुभ प्रभाव से जातक दीर्घायु होता है और स्वभाव से वह मृदुभाषी होता है। शुभ शुक्र व्यक्ति को गायन, वादन, नृत्य, चित्र कला, ख़र्चीला, आकर्षक व्यक्तित्व का बनाता है। ऐसे व्यक्ति का विपरीत लिंग पर आकर्षण अधिक होता है।
  • कुंडली मे शुक्र की उच्च या शुभ अवस्था होने पर गायक, सौन्दर्य से संबंधित कार्य, फैशन डिजाइनर ,नृतक, कलाकार, अभिनेता , आदि बनता है ।
शुक्र ग्रह की अस्त अवस्था:-  

वैदिक ज्योतिष के अनुसार कोई भी जब सूर्य के नजदीक या समीप आ जाएगा तब उस ग्रह का बल समाप्त हो जाएगा या वो ग्रह बलहीन अवस्था मे हो जाता है।
सूर्य से 09 अंश या इससे अधिक समीप आने पर शुक्र ग्रह अस्त हो जाता है। यदि शुक्र वक्री चल रहा है तो वह सूर्य से 7 अंश या इससे अधिक समीप आने पर शुक्र अस्त हो जायेगी।

शुक्र ग्रह का नीच राजभंग योग :-

कुंडली के किसी भी घर मे यदि शुक्र और बुध एक साथ कन्या राशि मे विराजमान है तो यह योग नीच राजभंग योग कहलाएगा।

क्योंकि बुध कन्या राशि मे उच्च के होते है और शुक्र कन्या राशि मे नीच के है , शुक्र और बुध का साथ मे विराजमान होना और बुध का अपनी उच्च राशि मे विराजमान होने से शुक्र का नीचतत्व ख़त्म हो जाएगा , एवं नीच राजभंग नामक योग का निर्माण होगा ।

शुक्र ग्रह का मीन राशि मे उच्चतत्व का बल प्राप्त होने के कारण कुंडली के बाहरवें भाव में होना अत्यधिक शुभ माना गया है , शुक्र का बाहरवें भाव मे होने से जातक बहुत भोगो को भोगने वाला ,धनी और सौभाग्यशाली होता है ।

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कुंडली मे कमजोर शुक्र के लक्षण :-

1. चेहरे की चमक का कम होना एवं जीवन मे सुख की कमी का होना ।

2. शुक्र कमजोर होने पर विपरीत लिंग की तरफ जल्दी आकर्षक हो जाते है ।

3. कमजोर शुक्र होने पर कमर में दर्द बना रहता है एवं कमजोर शुक्र वाले जातक की याददाश्त कमजोर होती है।

4. चेहरे की चमक और नेत्रज्योति में कमी आना ।

5. स्त्री पक्ष से किसी भी तरह का सुख ना मिलना ।

6. पुरुषों के विवाह के कारक शुक्र को माना गया है , कमजोर शुक्र होने पर विवाह में परेशानी का सामना करना पड़ता है ।

7. शुक्र का कन्या राशि मे होने से शुक्र नीच का स्वभाव दे कर कमजोर अवस्था मे होते है ।

8. जन्म कुंडली के छठे आठवें भाव में पापी ग्रहों के साथ होने पर शुक्र कमजोर अवस्था मे हो जाते है ।

9. शुक्र ग्रह सौन्दर्य , ऐश्वर्य , वैभव के कारक माने गए है , जन्म कुंडली मे कमजोर शुक्र होने पर कारकत्व में कमी देखी जाती है ।

10. कमजोर शुक्र वाले जातक को जल्दी  थकान हो जाती है , ऐसे लोगो को ज्यादा भीड़ वाली जगह पसन्द नही आती है ।

कहते है कलयुग में सुख की कल्पना करना भी कमजोर शुक्र ग्रह वाले जातक के लिए व्यर्थ है ।
शुक्र ग्रह को ऐश्वर्य , वैभव , मान-सम्मान , सुख सम्पति ,
भोग-विलास, शौहरत, कला, प्रतिभा, सौन्दर्य, रोमांस आदि का कारक माना गया है ।

क्या करे शुक्र ग्रह को बलवान करने के लिए :-

1. प्रतिदिन गाय को हरा चारा या हरी सब्जी अपने हाथ से खिलाये या प्रति शुक्रवार को खिलाएं ।

2. नवविवाहित कन्याओं के विवाह में जा कर उन्हें सौन्दर्य की वस्तु भेट में दे । ( जो की उनके कार्य मे आ सके )

3. पुराने मेले, फटे और गंदे कपड़े ना पहने , हमेशा साफ सुंदर कपड़े ही पहने ।

4. स्त्रियों का हमेशा सम्मान करें एवं हमेशा उनकी मदद करे ।

5. नियमित रूप से शिवलिंग पर दूध और सफेद फूल अवश्य चढ़ाए और हर शुक्रवार को सफेद वस्तु का दान मंदिर में या जरूरत मंद को करें एवं अपने शरीर पर हमेशा इत्र लगाए ।

6. कमजोर शुक्र को बल देने के लिए चांदी का भी उपयोग करना चाइये , चांदी शुक्र का धातु है , चांदी का कड़ा या अगुठे में चांदी का छल्ला पहना लाभकारी माना गया है ।

7. जन्म कुंडली मे कमजोर शुक्र वालो को सफेद कपड़ो का प्रयोग करना है ,कमजोर शुक्र वाले जातक को हमेशा अपना घर साफ सुंदर और सुंगधित रखना चाहिए ।

8. इलायची के पानी से शुक्र ग्रह को बलवान किया जा सकता है , एक इलायची को उबाल कर छान लें और अब इस पानी को अपने नहाने के पानी में मिला कर नहाए ।
ऐसा करने से शुक्र ग्रह की कृपा बनती है ।

9. कमजोर शुक्र को बल देने के लिए मंदिर या जरूरत मंद को प्रति शुक्रवार को चांदी , चावल, मिश्री, सफेद चंदन, दूध ,खीर , सफेद मिठाई का दान करना चाहिए ।

10. प्रति शुक्रवार को 1 माला (108 बार) शुक्र मंत्र का जाप घी का दीपक माता लक्ष्मी के सामने बैठ कर करना चाहिए ।
शुक्र मंत्र- ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।

• संकल्प की विधि:-

• किसी भी उपाय को शुक्ल पक्ष में शुरू करे उस दिवस प्रातःकाल सूर्योदय के 1 घंटे के भीतर दाहिने हाथ मे जल और पूर्ण अक्षत ले।

   अपना नाम, गोत्र, वार, तिथि,दिशा, स्थान के देवता का नाम, ईष्ट देवता का नाम लेकर ,

   बोले मै इस उपाय को (अपना उपाय बोले) इस कार्य हेतु (अपना कार्य बोले) कर रहा हूँ।

    जिसका पूर्ण फल आप स्वयं को प्राप्त हो ऐसा बोलकर अहम करिष्यामि बोलते हुए जल जमीन पर छोड़ दे।

शुक्र ग्रह के बताए गए उपाय में से कुछ उपाय करके
भी कुंडली में शुक्र ग्रह को मजबूत कर सकते है एवं जीवन में आ रही परेशानियों को दूर कर सकते है ।
उपाय कम से कम 90 दिनों तक लगातार करे और उचित फल की कामना करे।

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