राम एक मर्यादा पुरुषोत्तम

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शास्त्रो के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्री राम का जन्म हुआ था।

त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने श्रीराम का अवतार लिया।

राम जी का जन्म रानी कौशल्या की कोख से राजा दशरथ के घर में हुआ था।

श्रीराम अविनाशी परमात्मा और इस सृष्टि के पालनहार हैं। श्रीराम के चरित्र ने जाति के बंधनों से दूर रहकर कर्म को जाति का आधार माना है।

राम जी को सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पूजा जाता है, वो भी एक आदर्श पुरुष के रूप में।

थाईलैंड, इंडोनेशिया आदि कई देशों वे पूजनीय है। वे अंधेरों में उजालों, असत्य पर सत्य, बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक बनकर समाज कल्याण करते रहे।

भगवान राम विष्णु के सातवें अवतार थे। आज तक भगवान के अवतार होने के बावजूद केवल श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।

राम आदर्श पुरुष के रूप में जाने जाते है उनके बारे में कहा जाता है कि बेटा, राजा , पति हो तो राम जैसा।
हालांकि कई लोगो के मन मे यह प्रश्न आज भी उठता है कि राम में सभी आदर्श होने के बावजूद भी वे आदर्श पति और आदर्श पिता के रूप में पूर्ण रूप से सफल नही हो पाए।

इसके बारे में आपको बताना चाहूंगा कि वर्तमान समय मे व्यक्तियों के लिए सबसे पहले अपना परिवार आता है, किंतु जिस समय मे राजा राम का जन्म हुआ था उस समय सबसे पहले राष्ट्रहित था उसके बाद शहर ,गांव, पडौसी ओर अंत मे कुटुम्ब ओर परिवार से प्रेम रखा जाता था।

अगर हम वर्तमान पीढ़ी से राम की तुलना करें तो निश्चित ही हम यह कहेगे की राम ने केवल प्रजा के कहने पर सीता माता का त्याग कर दिया लेकिन हम उस समय की परिस्थितियों और राम के पद को ध्यान में रखकर सोचे तो प्रजा केवल प्रजा नही बल्कि एक परिवार था।

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इसमे राम के हृदय में स्वयं का हित नही था।

राजा के लिए स्वयं की इच्छा से कार्य करना स्वार्थी व गलत माना जाता था।

इस कारण यह नही कहा जा सकता कि उन्होंने पति धर्म नही निभाया।

चलिए जानते है कि राम के कौन से आदर्श उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाते है।

1. पिता की आज्ञा का पालन:-

राजा दशरथ के केवल एक बार कहने पर राम ने 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। अपने पिता से बिना कोई अन्य प्रश्न किये राम वनवास जाने की तैयारी करने लगे। यहाँ पर राम की सहनशीलता का भी परिचय स्पष्ट होता है कि कैकई के कहने पर 14 वर्ष वन में बिताए।

2. राजा के पद का त्याग:-

अपने पिता के आदेश देने के बाद भी राम वन को ना जाकर राजा बन सकते थे क्योंकि पूरी प्रजा चाहती थी कि राम को राजा बनाया जाए। किन्तु राम ने प्रजा को समझाया कि मेरा भाई भरत भी मेरे समान ही सबकी सेवा करेगा। वो भी एक श्रेष्ठ राजा बनने योग्य है।

3. आदर्श भाई के रूप में:-

राम के तीन छोटे भाई थे किंतु तीनो ही अलग अलग माँ के पुत्र थे। राम अपने भाइयों से अत्यंत प्रेम करते थे उनके मन मे अपने भाइयों के प्रति त्याग और समर्पण की भावना से ही लक्ष्मण वन को साथ गए। भरत को राजपाठ मिलने के बावजूद भी वे सिंहासन पर श्री राम की चरण पादुका रख के न्याय करते रहे।

4. विषम परिस्थितियों में धैर्य:-

रावण के द्वारा सीता माता का हरण करने के बाद भी राम जी ने धैर्य बनाए रखा वियोग की आग में जलते हुए भी स्वयं सीता माता का पता लगाकर वापस लेकर आए। सीता माता को वापस लाने के बीच लक्ष्मण के कई बार क्रोधित होने पर भी राम उनको अनुचित ना करने की प्रेरणा देते रहे।

5. सत्यता का पालन:-

राम ने सत्य के मार्ग पर चलते हुए सम्पूर्ण जीवनयापन किया। राम ने कभी न स्वयं अधर्म किया न ही कभी किसी को अधर्मी होने दिया। इसी कारण जब रावण ने सीता माता का कपट पूर्वक हरण किया और अधर्मी बना तो राम जी ने स्वयं उसका वध किया और विभीषण को राज्य दिलवाया।

6. आदर्श राजा राम:-

राम अपने राज्य में उच्च नीच, छोटे बड़े का भेद नही करते थे। राम सामाजिक थे वे जाती से कभी किसी को छोटा बड़ा नही समझते थे। इसी कारण उनके राज्य को आदर्श राज्य माना जाता है।
केवल धोबी के कहने से ही राम ने सीता माता को वन भेजने का निर्णय लिया हालांकि यह निर्णय उनके मन को भी दुख पहुचाने वाला था किंतु उन्होंने एक नियम का पालन किया।
राम ने सीता माता को केवल राज्य से निकाला था अपने हृदय से नही। वे अंत समय तक सीता माता को प्रेम करते रहे।

आज भी मानव समाज राम के इन सभी आदर्शो का पालन करता है। राम के द्वारा उनके जीवन मे लिए गए निर्णयों को आवश्यकता होने पर हमें अपने जीवन मे प्रयोग में लाना चाहिए।

आज कलयुग में हमे श्री राम के जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है ,

भगवान विष्णु के अवतार होने के बाद भी पूरा जीवन संघर्ष पूर्ण रहा ,

अनेको विपत्तियां आने के बाद भी श्री राम जी ने कभी हार नही मानी और जीवन की सभी विपत्तियों का डट का सामना किया,

हमारे जीवन मे भी अनेक तरह की विपत्तियां आती है परंतु हम उनसे घबरा जाते है ,
हमे बिना डरे उसका समाना करना चाहिए हिम्मत से काम लेना चाहिए।

हमे भगवान श्री राम से सिख मिलती है कि कष्ट और परेशानी तो भगवान के जीवन मे भी आई थी , फिर हम तो इंसान है ।

आज मानव जीवन के लिए सबसे बड़े मोटिवेशनल व्यक्ति श्री राम जी है।

श्री राम जी और उनके संघर्ष पूर्ण जीवन को हमारा शत शत नमन ।
जय जय सियाराम

दोस्तो श्री राम जी के बारे में बताए गए कथा के बारे आपकी क्या राय है कृपया Comment में जरूर बताएं

श्री राम जी मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों थे ये जानकारी अगर आपको अच्छी लगी हो तो…

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