Sunderkand Kab, Kyon Aur Kaise padhe? सुंदरकांड कब क्यों और कैसे पढ़े ।

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सुंदरकांड   (Sundar Kand)  में  श्री  हनुमान  जी  की  शक्ति  और  विजय  का  कांड  है।

यह  अतिसुंदर  एवं  अदभुत  कांड  है । सुंदरकांड   में  हनुमान  जी  का  सीता  माता  को  खोजने  के  लिए  की  गयी  लंका  यात्रा  का  सम्पूर्ण  मनमोहक  बखान  किया  गया  है।

सनातन  धर्म  के  शास्त्रों  मे  सुंदरकांड  (Sundar Kand)   का  महत्व  बताया  गया  है , हमे  सुंदरकांड (Sundar Kand)   पढ़ने  एवं  सुनने  के  लिए  कई  बार  बताया  जाता   है  परंतु  बहुत  ही  कम  लोगो  को  जानकारी  होती  है  कि  सुंदरकांड  कब  क्यों  और  कैसे  पढ़े ?   सुंदर कांड  का  नाम  सुंदरकांड  क्यों  है ?

आज  हम  इस  अदभुत  कांड  के  बारे  मे  चर्चा  करेंगे  ।

 

 सम्पूर्ण सुंदरकाण्ड

 

                          “जय जय सियाराम”

सुंदरकांड (Sundar Kand)  की  महिमा  अपरंपार  है।  कलयुग  में  सुंदरकांड  की  महान  व्याख्या  एवं  अद्भुत  शक्ति  प्रदान  की  गई है।

श्री रामचरितमानस  को तुलसीदासजी ने सात काण्डों में विभाजित किया है। सात काण्डों के नाम है : – बालकाण्ड,  अयोध्याकाण्ड,  अरण्यकाण्ड,  किष्किन्धाकाण्ड, सुंदरकांड  (Sundar Kand)  ,  लंकाकाण्ड  और  उत्तरकाण्ड।

श्री रामचरितमानस  सुन्दरकाण्ड  कितने  काण्ड  के  बाद  आता  है ?  Shree Raamcharitra Manas Sundarkand Kitne Kaand Ke Baad aata hai ?
श्री  रामचरितमानस  मे  सुंदरकांड  पांचवा  कांड  है।

सुंदरकांड  में  कितने  श्लोक,  छ्न्द,  चोपाई,  दोहे,  शब्द  हैं  ?  Sundarkand Me Kitne Shlok, Chand, Choupai, Dohe, Shabd  hai ?
पंचम  सोपान  सुंदरकांड  में  3 श्लोक ,  2 छ्न्द ,  58 चोपाई ,  60 दोहे ,  और  लगभग  6241 शब्द है ।

 

सुंदरकांड  में  श्री  हनुमान  जी  का  लंका  प्रस्थान,  लंका  दहन  से  लंका  से  वापसी  तक  का  सम्पूर्ण  घटनाक्रम  वर्णित  हैं।  इस  सोपान  के  मुख्य  घटनाक्रम  है : –

हनुमान जी   का  अपनी   भूली   हुई   शक्तियों   को  याद   करना,   लंका   की  और   प्रस्थान,   लंका  जाते   समय   मार्ग   में   कई   दानवों   और   असुरो   का   संहार   करना,   विभीषण   से   भेंट,  सीता   माता   से   भेंट   करके   उन्हें   श्रीराम  जी   की   मुद्रिका   देना,    लंका   दहन   करना,  सीता  माता   का   संदेश   श्रीराम   तक   ले   कर   आना,   अक्षय   कुमार   का   वध,   लंका   से  वापसी   के   साथ   साथ   विभीषण   का   श्री राम   के   चरणों   मे   आना।

सुंदरकांड  का  नाम  सुंदरकांड  क्यों  पड़ा ?  Sundarkand Ka Naam Sundarkand kyun Pada ?

हनुमान जी   सीता  माता   की   खोज   में   लंका   गए   थे   और   लंका   त्रिकुटाचल   पर्वत   पर   बसी   हुई   थी।   त्रिकुटाचल   पर्वत   यानी  यहां   तीन   पर्वत   से   मिलकर  बना   हुआ  पर्वत,   पहला   सुबैल   पर्वत   जहां   के   मैदान   में  युद्ध   हुआ   था।

दूसरा  नील   पर्वत  जहां  राक्षसों  के  महल  बसे  हुए  थे  और  तीसरे  पर्वत   का   नाम   है   सुंदर  पर्वत   जहां  अशोक  वाटिका  थी।  इसी  वाटिका  में  हनुमानजी  और  सीताजी की   भेंट   हुई  थी।  हनुमान  जी  द्वारा   रची   गई   सम्पूर्ण   लीला   का   अधिकतर   भाग   इस   सुंदर   पर्वत  पर  ही  है,  इसलिए इस महा कांड का  नाम  सुंदरकांड  रखा  गया  है |

सुंदरकांड  का  पाठ  कब  करें ?  Sundarkand Ka Paath Kb Kare ?

श्रीरामचरितमानस  के  सुंदरकांड (Sundarkand)  की  कथा  सबसे  अलग  हैं। संपूर्ण  श्रीरामचरितमानस  भगवान  श्रीराम  कें  गुणों  और  उनके  पुरुषार्थ  को  दर्शाती  हैं।  सुंदरकांड  एकमात्र  ऐसा  अध्याय  है  जो  श्रीराम  के  भक्त  हनुमान  की  विजय  का  है।

सुंदरकांड (Sundarkand)   का  पाठ  जल्दी  ही  फल  देने  वाला  एवं  अद्भुत  पाठ  है।  शास्त्रों  के  अनुसार Sundarkand   का  पाठ  मंगलवार  एवं  शनिवार  को  करने  का  प्रधान  है। इस  पाठ  को  किसी  भी  शुभ  वार  (दिन)  मंगल  के  नक्षत्र :-  मृगशिरा,  चित्रा  और  धनिष्ठा में  श्रेष्ठ  फलदायक  होता  है ।  Sundarkand  का  पाठ  सच्चे  मन  से  प्रातःकाल  या  संध्याकाल  में  कर  सकते  है ।

सुंदरकांड का पाठ क्यों करें ?  Sundarkand Ka Paath Kyun Kare ?

कलयुग  में  हर  दूसरा  मनुष्य  अपने -अपने  दुःखो  से  परेशान  है  और  अपने  दुःखो  का  पूर्ण  निवारण  के  लिए  तरह-तरह  के  पूजा  पाठ  एवं  उपाय  करता  और  करवाता  है।  त्रेता  युग  में  श्री राम  ने  हनुमान जी  को कलयुग  मे  प्रत्यक्ष  और  अप्रत्यक्ष  रूप  से  रह  कर  श्रीराम  और  हनुमान  जी  के  भक्तो  पर  कृपा  कर  उनकी  रक्षा  करने  का  आशीर्वाद  दिया  था ,  इसी  कारण  शास्त्रों  के  अनुसार  दुःखो  के  अंत  के  लिए  हनुमान  जी  द्वारा  किए  गए  महा  एवं  सुंदर कांड  को  नियमित  नियमपूर्वक  पढ़ने  एवं  सुनने  वाले  पर  हनुमान  जी की  असीम  कृपा  बनी रहती  है ।

 

सुंदरकांड  का  पाठ  करने वाले भक्त को हनुमान जी बल प्रदान करते हैं। उसके  आसपास  नकारात्मक  शक्ति  भटक  नहीं  सकती,  वे  इस  तरह  की  शक्ति  प्राप्त  करते है ।

जब  भक्त  का  आत्मविश्वास  कम  हो  जाए  या  दुःखो  से  घिर  जाए ,  जीवन  में  कोई  काम  ना  बन  रहा  हो,  तो  सुंदरकांड (Sundarkand)   का  पाठ  करने  से  सभी  काम  अपने  आप  ही बनने  लगते  हैं  और  हनुमान जी  की  कृपा  बनी  रहती  है ।

सुंदरकांड  का  पाठ  एक  तीर  से  कई  निशाने  लगाने  का  नाम  है।  पाठ  करने  से  रोग  दूर  रहते  हैं।  इससे  आपकी  दरिद्रता  खत्म  होती  है ,  शत्रु  पर  विजय  दिलाता  है  सुंदरकांड,   कर्ज  से  परेशान  व्यक्ति  को  सुंदरकांड  का  पाठ  करना  चाहिए  सुंदरकांड (Sundarkand)  का  पाठ  कर्ज  से  मुक्ति  दिलाता  है।

आज  के  समय  में  अधिकतर  मनुष्य  मानसिक  अशांति  से  परेशान  है  सुंदरकांड  पाठ  निरंतर  करने  से मानसिक सुख  शांति  प्राप्त  होती  है।

इसलिये  सुंदरकांड  का  पाठ  करना  चाहिए ।

 

सुंदरकांड  का  पाठ  केसे  करें  ?  Sundarkand Ka Paath Kaise Kare ?

सुंदरकांड  का पाठ  करने  का  आमतौर  कोई  विशेष  नियम  नही  है

बस  सच्चे  मन  से  और  शारारिक  मानसिक  शुद्धि  के  साथ  बाबा  श्री  हनुमान जी  का  सुंदरकांड  पढ़ा  जा  सकता  है।

परंतु  अगर  किसी  विशेष  कार्य  के  लिए  सुंदरकांड  का  पाठ  करा  जाए  तो  कुछ  नियमो  का  पालन  होता  है ।

मनोकामना  सिद्धि  के  लिए  सुंदरकांड  पाठ  का  नियम  :-

  • शुक्ल  पक्ष  के  मंगलवार  से  प्राम्भ  कर  कम  से  7  या  11  मंगलवार  पाठ  करना  चाहिए ।
  • पहले  मंगलवार  को  सूर्योदय  के  एक  घंटे  के  भीतर  दाहिने  हाथ  मे  शुद्ध  जल  व  अक्षत  (चावल)  ले  कर  पाठ  करने  का  संकल्प  लेना  चाहिए ।
  • संकल्प  लेने  लेते  समय  दिन  का  पंचाग,  अपना  नाम,  गोत्र,  स्थान ,  क्षेत्र  के  देवता  ( भेरू बाबा )  का  ध्यान  करने  हुए  संकल्प  लेना  चाहिए  की  सुंदरकांड का  पाठ  में  7  या  11  मंगलवार  करूँगा  या  करुँगी ।
  • सुंदरकांड (Sundarkand)   का  पाठ  करने  से  पहले  सबसे  पहले  गणेश  जी का  ध्यान  करें,  श्री रामचन्द्राय नमः मंत्र  का  11  बार  जाप  करे,  इसके  पश्चात  एक  बार  हनुमान चालीसा  का  पाठ  सुंदरकांड  पाठ  करने  से  पहले  एवं  अंत  मे  करें ।

 

पूजन विधि ( सरलतम विधि )  :- https://www.astroscienceco.com/नित्य-पूजा-पाठ-से-जुड़े-कुछ/

हनुमान जी  का  पूजन  करते  समय  सबसे  पहले  लाल  रंग  के  आसन  पर  पूर्व  दिशा  की  ओर  मुख  करके  बैठ  जाएं।

इसके  पश्चात  हाथ  में  फूल  व  अक्षत  (चावल )  लें  व  इस  मंत्र  से  हनुमानजी  का  ध्यान  करें-

अतुलितबलधामं  हेमशैलाभदेहं

दनुजवनकृशानुं  ज्ञानिनामग्रगण्यं।

सकलगुणनिधानं  वानराणामधीशं

रघुपतिप्रियभक्तं  वातजातं  नमामि।।

ऊँ  हनुमते  नम:  ध्यानार्थे   पुष्पाणि  सर्मपयामि।।

इसके  बाद  हाथ  में  लिया  हुआ  चावल  व  फूल  हनुमानजी  को  अर्पित  कर  दें।

आवाह्न-

हाथ  में  फूल  लेकर  इस  मंत्र  का  उच्चारण  करते  हुए  श्री हनुमान जी  का  आवाह्न  करें

एवं  उन  फूलों  को  हनुमान  जी  को  अर्पित  कर  दें।

उद्यत्कोट्यर्कसंकाशं जगत्प्रक्षोभकारकम्।

श्रीरामड्घ्रिध्याननिष्ठं सुग्रीवप्रमुखार्चितम्।।

विन्नासयन्तं नादेन राक्षसान् मारुतिं भजेत्।।

ऊँ हनुमते नम: आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।।

 

आसन :-

नीचे  लिखे  मंत्र  से  हनुमानजी  को  आसन  अर्पित  करें

(आसन के लिए कमल अथवा गुलाब का फूल अर्पित करें) अथवा  चावल  या  पत्ते  आदि  का  भी  उपयोग  हो  सकता  है  :-

तप्तकांचनवर्णाभं  मुक्तामणिविराजितम्।

अमलं  कमलं  दिव्यमासनं  प्रतिगृह्यताम्।।

 

इसके  बाद इन  मंत्रों  का  उच्चारण करते हुए

हनुमान जी  के  सामने  किसी  बर्तन  अथवा  भूमि  पर  तीन  बार  जल  छोड़ें।

ऊँ हनुमते नम:  पाद्यं  समर्पयामि।।

अध्र्यं  समर्पयामि।  आचमनीयं  समर्पयामि।।

इसके  बाद  हनुमानजी  को  गंध,  सिंदूर,  कुंकुम,  चावल,  फूल  व  हार  अर्पित करें।

 

इसके  बाद  केले   के   पत्ते   पर   या  किसी  कटोरी  में  पान  के  पत्ते  के  ऊपर  प्रसाद  रखें

और  हनुमानजी  को  अर्पित  कर  दें  तत्पश्चात  ऋतुफल  अर्पित  करें।  (प्रसाद  में  चूरमा,   चने  या  गुड़  चढ़ाना  उत्तम  रहता  है।

 

अब  सुंदरकांड  का  पाठ  ऊपर  बताए  नियमो  का  पालन  करते  सच्चे  मन  और  विश्वास  से  शुरू  करे।

 

इसके  पश्चात  संपूर्ण  पूजा  विधि  समाप्त  होने  के  पश्चात  आरती  करें ।  (गणेश जी, हनुमान जी , राम जी )

अब अंत मे श्री राम  स्तुति  करें , एवं  सियाराम जी और बाबा हनुमानजी का आश्रीवाद ले ।

“जय जय सियाराम”

इस प्रकार  पूजन  करने  से  हनुमान जी अति  प्रसन्न  होते  हैं  तथा  साधक  की  हर  मनोकामना  पूरी  करते  हैं ।

 

अगर  इस  का  पाठ  मनोकामना  सिद्धि  के  लिए  7  या  11  दिन  तक  किया  जाए  तो  आखरी  दिन  घर  के
आस-पास  किसी  भी  हनुमान  मंदिर  में  लड्डू  और  गुड़  चने  का  प्रसाद  और  हनुमान  जी  को ध्वजा  चढ़ाना  चाहिए ।

 

तो  मुझे  उम्मीद  है  की  AstroScienceCo  के  द्वारा  दी  गई  जानकारी

Sunderkand Ka Paath Kab, Kyon Aur Kaise padhe   से आप संतुष्ट होंगे |

 

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6 Comments

  1. 🙏श्री मानजी
    आपने मेरी कुण्डली देखकर
    मेरे बारे में बिलकुल सही जानकारी दी
    और समस्याओं के उपाय भी सुझाये ।
    आपका और आपके ज्ञान का मैं आदर करते हुए
    आभार प्रकट करता हूँ।
    धन्यवाद ।
    🙏

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